चंद्र कला क्या है और यह क्यों बदलती है?
चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं है। वह सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करता है, और पृथ्वी से देखने पर उसका प्रकाशित भाग घटता-बढ़ता दिखाई देता है। इसी बदलते रूप को चंद्र कला कहा जाता है। खगोलीय दृष्टि से यह सूर्य और चंद्रमा के बीच बनने वाले कोण पर निर्भर करता है, जिसे Wikipedia पर विस्तार से समझाया गया है।
अमावस्या के दिन यह कोण लगभग शून्य होता है, इसलिए चंद्रमा दिखाई नहीं देता। धीरे-धीरे बढ़ते हुए आधा चंद्रमा, गिबस और फिर पूर्णिमा आती है, जहाँ कोण लगभग एक सौ अस्सी अंश का हो जाता है। पूरा चक्र औसतन उनतीस से तीस दिनों में पूरा होता है।