मंगल दोष क्या है? शास्त्रों का दृष्टिकोण
ज्योतिष की परंपरा के अनुसार मंगल दोष उस स्थिति को कहा जाता है जब जन्म कुंडली में मंगल ग्रह कुछ निश्चित भावों में विराजमान हो। मंगल को साहस, ऊर्जा, पराक्रम और आत्मविश्वास का कारक माना गया है। जब यही ऊर्जा विवाह, सुख या मन से जुड़े भावों में आती है, तो शास्त्र उसे संतुलन की दृष्टि से देखते हैं। ध्यान रहे कि मंगल सदैव अशुभ नहीं होता; कई कुंडलियों में यह उत्तम फल भी देता है। Wikipedia पर मंगल के स्वरूप पर सामान्य जानकारी मिलती है। इसलिए केवल दोष का नाम देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जाता।