काल सर्प दोष बनता कैसे है?
जन्म के समय आकाश में ग्रहों की जो स्थिति होती है, वही कुंडली में अंकित की जाती है। जब राहु से केतु तक खींची गई काल्पनिक रेखा के एक ही तरफ सातों मुख्य ग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि — आ जाएँ, तो उसे काल सर्प दोष कहा जाता है।
ज्योतिष की परंपरा के अनुसार यह योग तभी बनता है जब कोई भी ग्रह दूसरी ओर न रहे। कुछ विद्वान लग्न (Ascendant) को भी गणना में जोड़ते हैं, इसलिए परिभाषाएँ थोड़ी भिन्न मिलती हैं। इसी कारण केवल एक वाक्य पढ़कर निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरी कुंडली का संदर्भ देखना उचित माना गया है।