इष्ट देवता क्या है और इसका अर्थ क्यों महत्वपूर्ण है?
सनातन परंपरा में इष्ट देवता को जीव की आत्मिक अभिलाषा और पूर्वजन्म के संस्कारों से जोड़कर समझा जाता है।
यह वह देवता माने जाते हैं, जिनकी उपासना से मन को स्थिरता और भीतर से बल मिल सकता है। शास्त्रों के मते इष्ट देवता केवल पूजा का विधान नहीं, बल्कि आत्म-बोध की दिशा भी है। भगवद्गीता में श्रद्धा के अनुसार देवता-चयन का संकेत भी मिलता है।
यही कारण है कि ज्योतिष में इसकी गणना आत्मा से जुड़े ग्रहों, विशेषकर आत्मकारक, के माध्यम से की जाती है। Wikipedia पर भी इस अवधारणा का सामान्य परिचय मिल जाता है।